मेरे मन की आवाज़ !
Sunday, November 20, 2011
"वही बच्चे कभी दिवार बन जाते हैं, और कभी वही पुल भी बन जाते हैं!"
Tuesday, October 11, 2011
" किसी का आँचल सजा नहीं सकते तो कम से कम खींचो तो मत ! "
Tuesday, September 20, 2011
" हमसफ़र कोई ऐसा हो जो परछाई की तरह साथ दे और आईने की तरह टोके; और हम से भी यही अपेक्षा करे "
" प्यार से जेहर भी पिलाओ तो उसका असर नहीं होता "
Tuesday, September 6, 2011
" चाँद को भी पंद्रह दिन लगते हैं , हमें तो बस दो ही दिन हुए हैं "
Wednesday, August 31, 2011
" कभी कभी समझ में नहीं आता - अपनी नज़र से देखूं, अपनों की नज़र से देखूं, दूसरों की नज़र से देखूं या दुनिया की नज़र से देखूं ! "
Tuesday, August 30, 2011
" अपना ही घर इतना गंदा है और मैं बाहर झाड़ू मार रहा हूँ "
Monday, August 29, 2011
" अपने ही घर में सूट पहनने से क्या फायदा ! "
Sunday, August 28, 2011
" प्यार में सब अपना लगता है, नफ़रत में सब पराया प्रतीत होता है; पर वास्तव में तो सब इत्तेफाक होता है "
" कभी लगता है की दो पल में जिंदगी मिल गयी, और कभी लगता है की पूरी जिंदगी में वो दो पल नहीं मिले !! "
" कहाँ तास के पत्तों का घर और कहाँ ताजमहल !! "
" कौनसा प्यार कब किस तरफ खींचता है पता ही नहीं चलता !!! "
" प्यार को अपनी हिम्मत बनाओ, उसे अपनी जरुरत मत बनाओ..."
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